Saturday, 23 November 2019

हरियाणा विधानसभा चुनाव और नोटा (NOTA) का मुद्दा!

(हरियाणा राज्य कमेटी के गैर जनवादी आचरण पर हमारा पक्ष)
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नौजवान भारत सभा की सिरसा (हरियाणा) जिला इकाई द्वारा जिला कमेटी की विस्तारित मीटिंग बुलाकर आ रहे हरियाणा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी कार्य योजना बनाई थी। मीटिंग में यह फैसला किया गया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में शासक वर्ग की चुनावी पार्टियों की पोल खोलने का अभियान चलाया जाएगा और इसके अंतर्गत लोगों से अपील की जाएगी कि शासक वर्ग की चुनावी पार्टियों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों को नकारते हुए नोटा का बटन दबाया जाए। जिला कमेटी के आह्वान पर सिरसा जिले के 4 विधानसभा क्षेत्रों रानिया, ऐलनाबाद, कालांवाली और डबवाली में पोल-खोल अभियान चलाया गया। 

पर चल रहे अभियान के दौरान नौजवान भारत सभा की हरियाणा राज्य कमेटी द्वारा एक गैर-जिम्मेदाराना बयान जारी किया गया। जिसमें नौजवान भारत सभा के घोषणापत्र और संविधान का संदर्भ देते हुए कहा गया कि यह किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करने, बहिष्कार करने और नोटा का बटन दबाने का आह्वान नहीं करता। उसी समय हमारे द्वारा हाथ लिए गए कार्यों में व्यस्तता; जैसे चुनाव पोल खोल अभियान, मातृभाषा चेतना अभियान व अन्य सांगठनिक व्यस्तताओं, के कारण हमारे द्वारा इस मुद्दे पर अपना पक्ष पेश करने में थोड़ा विलंब हुआ। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहते हैं। हमारा यह मानना है कि जिला कमेटी सिरसा द्वारा चलाए जा रहे अभियान के दौरान हरियाणा राज्य कमेटी द्वारा ऐसा आह्वान करना भ्रामक, गैर जनवादी और सांगठनिक सिद्धांतों का उल्लंघन है। 

यह बयान मूल रूप में हरियाणा की राज्य कमेटी द्वारा जारी किया गया। पर यह बयान राज्य कमेटी की किसी मीटिंग में पास नहीं किया गया। क्योंकि हरियाणा की राज्य कमेटी में सिरसा से साथी पावेल कमेटी में शामिल हैं। उनको राज्य कमेटी की मीटिंग का कोई आमंत्रण नहीं आया। साथ ही सिरसा जिला कमेटी को राज्य कमेटी ने मीटिंग में अपना पक्ष रखने का कोई मौका दिए बिना ही अपना बयान दाग दिया। अगर राज्य कमेटी को सिरसा जिला कमेटी के इस निर्णय से कोई आपत्ति थी तो होना यह चाहिए था कि राज्य कमेटी की तुरंत मीटिंग बुलाई जाती और मसला राज्य कमेटी की मीटिंग के अंदर हल किया जाता। यहां सिरसा जिला कमेटी को अपनी बात कहने का मौका दिया जाता। पर ऐसी कोई कोशिश नहीं की गई और बिना हरियाणा राज्य कमेटी की मीटिंग के सिरसा जिला कमेटी के विरुद्ध सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी शुरू कर दी गई। हरियाणा राज्य कमेटी बनने के बाद, जिसको बने हुए 2016 से लेकर अब तक 3 वर्ष से ज्यादा समय हो गया है।और इसकी राज्य कमेटी की अभी तक सिर्फ दो मीटिंग हुई हैं। बिना राज्य कमेटी की मीटिंग किए ऐसा भ्रामक बयान जारी कर मनमर्जी करना, एक गैर जनवादी रवैया है और यह सरसा क्षेत्र में चल रहे अभियान को तहस- नहस करने की कोशिश करार दिया जाना चाहिए।

नौजवान भारत सभा का घोषणापत्र और संविधान के कार्यक्रम की 7वीं धारा  नोटा के आह्वान का कोई निषेध नहीं है। हरियाणा में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य कमेटी द्वारा मीटिंग बुलाकर कोई योजना नहीं बनाई गई और जब पूरे राज्य में एक राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ था है तो इस मौके पर राज्य कमेटी द्वारा अपने कार्यकर्ताओं का कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं दिया गया। इसलिए ऐसे मौके पर राज्य कमेटी द्वारा स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान न किए जाने के चलते सिरसा जिला कमेटी द्वारा विस्तारित मीटिंग बुलाकर अपने तौर पर संसदीय चुनाव का पोल खोल अभियान चलाने की योजना बनाई गयी थी। 

नौजवान भारत सभा की हरियाणा राज्य कमेटी का यह रवैया धौंस दिखाने वाला और गैर जनवादी है और साथ ही खास तरह की राजनीति को पूरे संगठन पर जबरी लादने का प्रयत्न है। नौजवान भारत सभा का संविधान और घोषणापत्र इसकी आज्ञा नहीं देता कि संगठन के जिम्मेदार पदों पर कार्यरत साथी किसी राजनीतिक पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए, उसकी तरफ से उम्मीदवार बन संसदीय चुनाव लड़ें। पर संगठन के संविधान और घोषणापत्र की अवहेलना करते हुए नौजवान भारत सभा की केंद्रीय परिषद तक के कई साथियों द्वारा सीधा-सीधा राजनीतिक दलों के उम्मीदवार बन संसदीय चुनावों में भागीदारी की गई। साथ ही नौजवान भारत सभा का संविधान और घोषणापत्र किसी  राजनीतिक पार्टी के साथ साझा गतिविधियां करने का कहीं भी समर्थन नहीं करता। पर नौजवान सभा के ये साथी लगातार इसका उल्लंघन करते रहे हैं और किसी खास राजनीतिक पार्टी के साथ लगातार साझा गतिविधियां करते रहे हैं। उपरोक्त मुद्दों पर संगठन द्वारा क्या अवस्थिति अपनाई जाए इसके लिए यह मुद्दा केंद्रीय परिषद के विचाराधीन आता है। पर एक या दूसरे कारण के चलते केंद्रीय परिषद् की मीटिंग को आगे डाल दिया जाता है, केंद्रीय परिषद की पिछली मीटिंग में उत्तर प्रदेश के साथियों ने अगली मीटिंग की मेजबानी करने की जिम्मेदारी ली थी, पर उनके अपने कारणों के चलते मीटिंग करवाने में असमर्थता जाहिर की तो मेजबानी तय करने का जिम्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने लिया। पर उसके बाद अभी तक केंद्रीय परिषद की मीटिंग नहीं हुई। जिसमें इन मसलों समेत, जनदिशा को लागू करने जैसे लंबे समय से चले आ रहे अंतर, जैसे मसलों को हल किया जाना था। संवैधानिक तौर पर हर 6 महीने में होने वाली केंद्रीय परिषद की मीटिंग हुए 1 वर्ष से ज्यादा का समय बीत चुका है। वर्ष 2014 में नौजवान भारत सभा के राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद अब तक सिर्फ चार मीटिंग हुई हैं। पर साथियों ने उपरोक्त मुद्दों पर संविधान का उललघंन लगातार जारी रखा हुआ है। हमारा यह स्पष्ट मानना है कि बिना किसी संवैधानिक संशोधन के संसदीय चुनाव और संसदीय पार्टियों के प्रति ये रुख सांगठनिक-संवेधानिक सिद्धांतों का निषेध, जनदिशा की पद्धति का निषेध और गैर जनवादी है। 

हम उपरोक्त आपत्तियां दर्ज करवाते हुए हरियाणा राज्य कमेटी द्वारा सिरसा जिला कमेटी के प्रति अपनाए गए इस व्यवहार को पूरी तरह से गैर जनवादी और धौंस दिखाने वाला करार देते हैं। 

जारीकर्ता:- पावेल, हरियाणा राज्य कमेटी सदस्य, 
छिंदरपाल, राष्ट्रीय महासचिव, 
नौजवान भारत सभा

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